उपर्युक्त उद्देष्यों की पूर्ति के निर्मित निम्नांकित साधन और कार्य अपनाये जायेंगे |
पारीक-परिषद के उद्देष्यों की पूर्ति हेतु कोष की व्यवस्था निम्न प्रकार से होगी
पारीक समाज के प्रत्येक परिवार का कोई एक व्यक्ति जिसकी आयु अठारह वर्ष से कम न हो, परिषद का सदस्य बन सकता है। सदस्यता का इच्छुक व्यक्ति निर्धारित सदस्यता शुल्क और प्रवेष राषि सहित निर्धारित आवेदन पत्र भर कर महामंत्री या अध्यक्ष को प्रस्तुत करेगा। अध्यक्ष की स्वीकृति के उपरान्त ही आवेदक विधिवत सदस्यता ग्रहण कर सकेगा ।
जो सज्जन परिषद को १०००० दस हजार ५०,००० पचास हजार रूपये या इससे अधिक द्रव्य या सम्पति का दान एक बार में देंगे वे कार्यकारिणी की स्वीकृति से परिषद के आजीवन संरक्षक होंगे।
जो महानुभाव परिषद को ५०००।- (पांच हजार रूपये) या इससे अधिक राषि दान स्वरूप भेंट करेंगे, वे कार्यकारिणी की स्वीकृति से परिषद के आजीवन सदस्य होंगे ।
परिषद के वे सदस्य जो एकमुष्त २१०० रूपये प्रदान करेंगे वे स्थायी सदस्य के रूप में मान्य होंगे और उन्हे प्रति वर्ष वार्षिक शुल्क नही देना होगा ।
संविधान की धारा २ (VII) के अन्तर्गत उदयपुर मण्डल के अन्य नगरों और ग्रामों में स्थापित परिषद की शाखाओं से चयनित होकर आने वाले अधिकतम दो सदस्य परिषद के प्रतिनिधि सदस्य कहलायंेगे। प्रतिनिधि भेजने वाली संस्था अपनी वार्षिक आय का दषमांष प्रतिवर्ष परिषद के उदयपुर कार्यालय में जमा करायेगी। शाखाओं के प्रतिनिधि चूंकि पारीक महासम्मेलन और परिषद के वार्षिक चुनाव जैसे विषिष्ट अवसरों पर ही आयेंगे अतः उनसे केवल प्रवेष शुल्क ही लिया जायेगा, वार्षिक शुल्क नहीं। प्रतिनिधि सदस्य अपने में से चार सदस्य चयनित करेंगे। जो परिषद की कार्यकारिणी में सम्मिलित किये जायेंगे।
परिषद के सदस्य को निम्न परिस्थितियों में सदस्यता से पृथक किया जा सकेगा:
परिषद के निम्न पदाधिकारी होंगे
इन पदाधिकारियों का चुनाव प्रति वर्ष प्रति दो वर्ष में परिषद के साधारण सदस्यों से साधारण सदस्यों के द्वारा किया जायेगा।
संविधान में परिषद के तीन-चैथाई (उपस्थितों में से) संख्या के बहुमत से संषोधन किया जा सकेगा।