Pareek Parishad, Udaipur

उदयपुर शहर, जिसे झीलो की नगरी के नाम से भी जाना जाता है, की स्थापना महाराणा उदय सिंह द्वितीय के द्वारा सन् 1559 मे की गई। यह शहर राजस्थान के दक्षिणी भाग मे स्थित है। इस शहर के सौन्दर्य व खुबसूरती का आनन्द लेने के लिए प्रति वर्ष़ हजारों पर्यटक भ्रमण के लिए यहॉ आते है। उदयपुर शहर की अधिक जानकारी के लिए वेब साईट http://en.wikipedia.org/wiki/Udaipur को देखे।

पारीक-परिषद् का गठन सन् 1992 मे उदयपुर शहर व इसके आसपास रहने वाले सभी पारीक परिवारो को एकता व भाईचारे के सूञ मे बॉधने के उद्देश्य से किया गया। पिछले कई वर्षो से परिषद् समाज मे विकसित विभिन्न भ्रान्तियों व बुराईयों का उन्मूलन करने, समाज के उत्थान व इसमे नई चेतना लाने के लिए निरन्तर कार्य कर रही है। परिषद् के मुख्य उद्देश्य निम्न प्रकार से है ।

  • पारीक बाह्मण समाज को आध्यात्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, शारीरिक, बौद्दिक, मानसिक व आर्थिक उन्नति के लिए प्रोत्साहित करना संस्था का ध्येय होगा।
  • पारीक-समाज को अपने मूल वैदिक धर्म के प्रति उन्मुख कर तद् नुकूल विधा-ग्रहण एवं आचरण हेतु प्रेरित करना तथा नित्य नैमितिक कर्मो, पंच-महायज्ञो और संस्कारो के लिए प्रेरणा देना।
  • समाज में फैली कुरीतियों, कुप्रथाओ, अन्धविशवासो, भ्रान्तियों ओर अवैज्ञानिक मान्यताओ के निराकरण हेतु प्रयास करना।
  • अन्य शास्त्रोक्त एवं परम्परागत ब्राह्मण वर्गो मे आपसी भेद-भाव समाप्त कर एकता का भाव उत्पन्न करना और परस्पर वैवाहिक सम्बन्धो की स्थापना का प्रयत्न करना।
  • समाज की आर्थिक उन्नति के लिए शिल्प, कृषि, आयुर्वेद, ज्योतिष, व्यापारादि अर्थकरी विधाओ की शिक्षा की व्यवस्था करना।
  • जातिय विधवाओं और दीन अनाथों के आश्रयार्थ यथाशक्ति प्रबन्ध करना।
  • उदयपुर मण्ङळ के विभिन्न नगरो और ग्रामों मे परिषद् की शाखाए व उपशाखाए स्थापित करना।
  • आदर्श विघालयों की स्थापना कर उनमे उच्च शिक्षा का प्रबन्घ करना।
  • समय-समय पर पारीक सम्मेलन और आवश्यक होने पर महासम्मेलन अयोजित करना।
  • परिषद् की उन्नति मे सहायक अन्य आवश्यक विषयों पर भी आवश्यकतानुसार विचार करना।